समकालीन दक्षिण एशिया
यह विश्व का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिसके अंतर्गत मुख्य रूप से 8 देशों को शामिल किया गया है जैसे- भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव एवं अफगानिस्तान को शामिल किया गया है | इसीलिए इस क्षेत्र को समकालीन दक्षिण एशिया कहा जाता है |
भौगोलिक स्थिति
उत्तर में विशाल हिमालय पर्वत श्रृंखला, दक्षिण का हिंद महासागर, पश्चिम का अरब सागर और पूर्व में मौजूद बंगाल की खाड़ी दक्षिण एशिया को भौगोलिक विशिष्ट का प्रदान करते हैं |
दक्षिण एशिया के देशों की राजनीतिक स्थिति
राजनीति एवं शासन प्रणाली को निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है-
- भारत और श्रीलंका के मध्य आजादी के बाद से ही लोकतंत्र स्थापित है |
- पाकिस्तान और बांग्लादेश में कभी लोकतंत्र तो कभी सैन्य शासन प्रणाली का होना |
- नेपाल में 2006 तक संवैधानिक राजतंत्र था, लेकिन 2008 में लोकतंत्र की बहाली हो गई थी |
- भूटान में 2008 में संवैधानिक राजतंत्र बना |
- मालदीप में 1968 तक सल्तनत हुआ करता था, लेकिन अब यहां पर भी लोकतंत्र स्थापित है |
- दक्षिण एशिया के लोग लोकतंत्र को सबसे अच्छा मानते हैं और प्रतिनिधि मूलक लोकतंत्र की संस्थाओं का हमेशा से समर्थन करते आए हैं |
पाकिस्तान में सेना और लोकतंत्र
- पाकिस्तान के पहले संविधान बनने के बाद देश की शासन की बागडोर अयूब खान ने अपने हाथों में ले ली थी और जल्दी ही अपना निर्वाचन कर लिया |
- शासन के खिलाफ जनता का गुस्सा भड़क उठा और जनरल याहिया खान ने शासन की बागडोर संभाली और इसी के साथ सैनिक शासन स्थापित हो गया |
- याहिया खान के सैनिक शासन के दौरान पाकिस्तान को बांग्लादेश संकट का सामना करना पड़ा और 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध भी हुआ था |
- पूर्वी पाकिस्तान टूटकर एक स्वतंत्र देश बना, जो कि वर्तमान में बांग्लादेश कहलाता है |
- 1971 से 1977 तक जुल्फिकार अली भुट्टो के नेतृत्व में एक निर्वाचित सरकार बनी |
- जनरल जिया उल हक ने 1777 में इस सरकार को गिरा दिया और पुन: सैनिक शासन स्थापित कर दिया |
- 1982 के बाद जनरल जिया उल हक को लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का सामना करना पड़ा और 1988 में बेनजीर भुट्टो के नेतृत्व में लोकतांत्रिक सरकार बनी |
- निर्वाचित लोकतंत्र की व्यवस्था 1999 तक कायम रही |
- 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने प्रधानमंत्री नवाब शरीफ को हटाकर खुद गद्दी पर बैठ गए और इस तरह 2001 में परवेज मुशर्रफ ने अपना निर्वाचन राष्ट्रपति के रूप में कर लिया |
- 2008 से पाकिस्तान में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेता शासन कर रहे हैं |
पाकिस्तान में लोकतंत्र के स्थाई ना होने के कारण
- पाकिस्तान में धार्मिक समूहों का सामाजिक दबदबा होना जिसकी वजह से निर्वाचित सरकारों को गिरकर सैनिक शासन कायम होता है |
- पाकिस्तान की भारत के साथ तनातनी का होना जिसकी वजह से सैना समर्थक समूह ज्यादा मजबूत है |
- अंतरराष्ट्रीय समर्थन का आभाव होना |
- अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने अपने स्वार्थ से गुजरे वक्त में पाकिस्तान में सैनिक शासन को बढ़ावा दिया था |
बांग्लादेश: एक नजर में
- 1947 से 1977 तक बांग्लादेश पाकिस्तान का अभिन्न अंग था |
- 1947 से 1971 तक इस पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था |
- इस क्षेत्र के लोग पश्चिमी पाकिस्तान के दबदबे और अपने ऊपर उर्दू भाषा को लड़ने के खिलाफ थे, इस कारण से लोगों ने बंगाली संस्कृति और भाषा के साथ किया जा रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ विरोध जताना शुरू कर दिया था |
- इस क्षेत्र की जनता ने राजनीतिक सत्ता में समुचित हिस्सेदारी की मांग भी उठाई और साथ ही प्रशासन में भी अपने न्याय उचित प्रतिनिधित्व की मांग को जोरदार तरीके से उठाया |
- पश्चिमी पाकिस्तान के प्रभुत्व के खिलाफ जन संघर्ष का नेतृत्व शेख मुजीबुर रहमान ने किया था रहमान की नेतृत्व वाली “अवामी लीग” को पूर्वी पाकिस्तान की सारी सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी |
- आमामी लीग को संपूर्ण पाकिस्तान के लिए प्रस्तावित संविधान सभा में बहुमत हासिल हो गया, लेकिन सरकार पर पश्चिमी पाकिस्तान के नेताओं का दबा दबा था और सरकार ने इस सभा को आहत करने से इनकार कर दिया और साथ ही शेख मुजीब को गिरफ्तार कर लिया |
- जनरल याहिया खान के सैनिक शासन में पाकिस्तानी सैना ने पूर्वी पाकिस्तान की जनता के आंदोलन को कुचलना की भरपूर कोशिश की थी, जिसमें हजारों लोग पाकिस्तानी सैना के हाथों मारे गए और बड़ी संख्या में पूर्वी पाकिस्तान के लोग भारत में पलायन कर गए, इस तरह भारत के सामने शरणार्थियों को संभालने की समस्या भी खड़ी हो गई थी |
पूर्वी पाकिस्तान के लोगों की आजादी की मांग
- भारत सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान के लोगों की आजादी की मांग का समर्थन किया और उन्हें वित्तीय और सहायता सैन्य सहायता प्रदान की जिसके परिणाम स्वरुप 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया |
- युद्ध की समाप्ति पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तान सैना के आत्म समर्पण तथा एक स्वतंत्र राष्ट्र बांग्लादेश के निर्माण के रूप में हुई थी |
- बांग्लादेश ने अपना संविधान बनाकर उसमें अपने को एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक समाजवादी देश घोषित कर दिया |
- 1975 में शेख मुजीबुर रहमान ने संविधान में संशोधन कराया और संसदीय प्रणाली के स्थान पर अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली को मान्यता दी गई अपनी पार्टी “आगामी लीग” को छोड़ शेष अन्य पार्टियों को समाप्त कर दिया 1975 की अगस्त में सैना ने शेख के खिलाफ बगावत कर उनकी हत्या कर दी |
- नए सैनिक शासक जियाउर रहमान ने अपनी “बांग्लादेश नेशनल पार्टी” बनाई और 1979 में चुनाव में विजय प्राप्त की लेकिन जियाउर रहमान की हत्या हुई और लेफ्टिनेंट जनरल एच एम इरशाद के नेतृत्व में सैनिक शासन फिर स्थापित हुआ,
- 1970 में जनता के व्यापक विरोध के कारण जनरल इरशाद को राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा |
- 1991 में चुनाव के बाद से बांग्लादेश में बहुदलीय चुनाव पर आधारित प्रतिनिधि मूलक लोकतंत्र कायम हुआ
नेपाल में राजतंत्र और लोकतंत्र का होना
- नेपाल में लंबे समय तक राजा और लोकतंत्र में लोकतंत्र समर्थकों में जदो जहेद चलती रही|
- नेपाल में राजा की सेना लोकतंत्र समर्थकों और माओवादियों के बीच लंबा संघर्ष चला |
- मजबूत लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के दबाव में राजा ने 1990 में नई लोकतांत्रिक संविधान की मांग मान ली |
- 2008 में नेपाल राजतंत्र को समाप्त करने के बाद लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया |
- 2015 में नेपाल में नया संविधान बनाया गया |
श्रीलंका में जातीय संघर्ष और लोकतंत्र
- श्रीलंका को 1948 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी, उन दिनों श्रीलंका को शिलांग के नाम से जाना जाता था |
- श्रीलंका की राजनीति पर बहुसंख्यक सिंहली समुदाय का दबदबा था, सिहाली समुदाय भारत छोड़कर श्रीलंका आपसी एक बड़ी तमिल आबादी के खिलाफ है
- तमिलनाडु द्वारा श्रीलंका में अलग राष्ट्र की मांग और संसाधनों पर अधिकार के कारण सिहली समुदाय से संघर्ष शुरू हो गया |
- 1983 के बादउग्र तमिल संगठन “लिबरेशन टाइगर्स आफ तमिल ईलम” अर्थात लिटटे श्रीलंका के साथ सशस्त्र संघर्ष किया |
- 1987 में भारत सरकार श्रीलंका के तमिल मसाले में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुई और इस तरह भारतीय सेना को शांति स्थापित करने की आशा में श्रीलंका भेजा गया |
- 1989 में भारत ने अपनी शांति सेवा बिना लक्ष्य प्राप्त किया वापस बुला ली |
- अंततः सशस्त्र संघर्ष समाप्त हुआ, क्योंकि 2009 में लिथे को खत्म कर दिया गया |
मालदीप में सल्तनत और लोकतंत्र
- मालदीव 1968तक सल्तनत हुआ करता था, लेकिन1968 में यह एक गणतंत्र बना और शासन की अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली कोअपनाया गया |
- जून,2005 में मालदीव की संसद ने बहुदलीय प्रणाली को अपनाने के पक्ष में एक मत से मतदान किया |
- मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी एम.डी.पी. का देश की राजनीतिक मामलों में प्रभुत्व है |
- 2005 के चुनाव के बाद मालदीव में लोकतंत्र मजबूत हुआ, क्योंकि इस चुनाव में विपक्षी दलों को कानूनी मान्यता दे दी गई |
भूटान में संवैधानिक राजतंत्र
भूटान 2008 में संवैधानिक राजतंत्र बन गया राजा के नेतृत्व में यह बहुदलीय लोकतांत्रिक प्रणाली के रूप में उभरकर सामने आया |
पड़ोसी देशों के साथ संबंध
पाकिस्तान के मध्य विवाद के प्रमुख मुद्दे
- सक्रिक रेखा सियाचिन ग्लेशियर और कश्मीर दोनों के मध्य विवाद के मुख्य क्षेत्र रहे हैं |
- पाक द्वारा संदेह की दृष्टि से देखना |
- कश्मीरी उग्रवादियों को हथियार और प्रशिक्षण के साथ ही धन मुहेया करवाना |
- पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई.एस.आई. द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त होना |
- पाकिस्तान आतंकवादियों को सुरक्षा प्रदान करता है |
पाकिस्तान के मध्य सहयोग के प्रमुख मुद्दे
- 1960 में विश्व बैंक की सहायता से भारत और पाकिस्तान ने सिंधु जल नदी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे |
- करतारपुर गलियारे से दोनों देशों के संबंधों में सुधार की एक नई उम्मीद बंधी थी |
नेपाल के मधुर संबंध
भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संधि है, जो दोनों देशों के नागरिकों और वस्तुओं की मुक्त आवाजाही की अनुमति देता है | इस संधि के तहत दोनों देशों के नागरिक एक दूसरे देश में बिना पासपोर्ट और वीजा के आ जा सकते हैं और काम कर सकते हैं |आपदा प्रबंधन के साथ तकनीकी और मानवीय सहायता भी समय-समय पर प्रधान करता रहता है |
भारत नेपाल के विवाद के प्रमुख बिंदु
- नेपाल की चीन के साथ दोस्ती को लेकर रहता है |
- चारों ओर जमीन से गिरे नेपाल को लगता है कि भारत उसको अपने बूथ क्षेत्र से होकर समुद्र तक जाने से रोकना है |
- नेपाल के लोगों का मानना है कि भारत सरकार नेपाल के अंदरूनी मामलों में दखल देती है |
- उनका कहना है कि भारत नेपाल के नदी जल और पन बिजली पर आंखें गड़ाए बैठा है |
बांग्लादेश संबंध (सहयोग के क्षेत्र)
- आपदा प्रबंधन विकास आर्थिक सहयोग से संबंधित मामलों में एक दूसरे के निकट होना |
- बांग्लादेश भारत की “लुक ईस्ट” और 2014 से “एक्ट ईस्ट” नीति का हिस्सा है |
- पर्यावरण के मसले पर भी सहयोगात्मक रवैया |
- भारत ने बांग्लादेश को कोविद-19 के दौरान वैक्सीन देने में भी सहयोग किया है |
विवाद के क्षेत्र
- ढाका पर भारत को प्राकृतिक गैस निर्यात न करने का फैसला |
- भारतीय सेना को पूर्वोत्तर भारत में आने के लिए अपने इलाके से बांग्लादेश का रास्ता देने से इनकार भारत विरोधी इस्लामी कट्टरपंथी जमातों का असर |
- गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी पर जल विवाद |
- बांग्लादेश सरकार भारत सरकार पर चटगांव पर्वतीय क्षेत्र में विद्रोह को हवा देने बांग्लादेश के प्राकृतिक गैस में सेंधमारी करने और व्यापार में बेईमानी करने के आरोप लगना |
श्रीलंका-भारत मधुर संबंध
- भारत ने श्रीलंका के साथ मुक्त व्यापार समझौता पर हस्ताक्षर के लिए जिससे दोनों देशों के मध्य व्यापारिक संबंध प्रगाढ़ हुए थे |
- श्रीलंका में सुनामी से हुई तबाही में भारत ने पुन निर्माण में सहायता प्रदान की |
श्विवाद के मुख्य बिंदु
- भारत और श्रीलंका की सरकारों के संबंध में तनाव श्रीलंका में जातीय संघर्ष को लेकर हुआ |
- 1987 में भारत की शांति सेना को श्रीलंका में भेजने के बाद से भारत सरकार श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में असलंग्नता की नीति पर अमल कर रही है |
भूटान –भारत संबंध
- भारत और भूटान के मध्य संबंध मधुर है |
- भारत भूटान की पन बिजली की बड़ी योजनाओं में हाथ बंटाता रहा है |
- भारत भूटान को विकास कार्यों के लिए अनुदान भी देता है |
मालदीव सहयोग के क्षेत्र
- मालदीव के साथ भारत के संबंध सौहार्दपूर्ण और गर्म जोशी से भरे हुए हैं |
- 1981 में मालदीप में भाड़े के सैनिकों द्वारा किए गए षड्यंत्र को नाकाम करने के लिए भारत ने वाहन सेवा भेजी |
- भारत ने मालदीव के आर्थिक विकास, पर्यटन, मत्स्य उद्योग, में भी सहायता प्रदान की थी|
निष्कर्ष:
समकालीन दक्षिण एशिया राजनीतिक उथल-पुथल और सहयोग के दोहरे दौर से गुजर रहा है जहाँ पर भारत की केन्द्रीय भूमिका के साथ सभी देश एक दूसरे पर निर्भर है | आज 21 वीं सदी के दौर में वैश्विक मंच और दक्षिण एशिया में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है |