कार्यपालिका (Executive) Class 11 Political Science Notes in Hindi

कार्यपालिका (Executive) Class 11 Political Science Notes in Hindi

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परिचय

किसी भी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को सफल बनाने के लिए केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उन कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना भी आवश्यक होता है। यदि विधायिका (Legislature) कानून बनाती है और न्यायपालिका (Judiciary) उन कानूनों की व्याख्या तथा न्याय प्रदान करती है, तो कार्यपालिका उन कानूनों को व्यवहार में लागू करके शासन का संचालन करती है।

भारत के संविधान निर्माताओं ने ऐसी कार्यपालिका की कल्पना की थी जो लोकतांत्रिक मूल्यों, उत्तरदायित्व और जनकल्याण के सिद्धांतों पर आधारित हो। भारतीय शासन प्रणाली में कार्यपालिका का स्वरूप संसदीय प्रणाली (Parliamentary System) पर आधारित है, जिसमें राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जबकि वास्तविक कार्यकारी शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती है।

कार्यपालिका (Executive) क्या है?

सरकार का वह अंग है जो राज्य के प्रशासन का संचालन करता है तथा विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों और नीतियों को लागू करता है।

“कार्यपालिका वह संस्था है जो शासन चलाती है तथा सरकारी निर्णयों को व्यवहार में लागू करती है।”

यह एक व्यक्ति नहीं होती, बल्कि इसमें अनेक पदाधिकारी और संस्थाएँ शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए भारत में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद तथा स्थायी प्रशासन (नौकरशाही/सिविल सेवा) सभी कार्यपालिका का हिस्सा हैं।

भारत में कार्यपालिका दो स्तरों पर कार्य करती है—

  • राजनीतिक कार्यपालिका (Political Executive) – राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्री।
  • स्थायी कार्यपालिका (Permanent Executive) – सिविल सेवक एवं प्रशासनिक अधिकारी, जो सरकार बदलने पर भी अपने पद पर बने रहते हैं।

राजनीतिक कार्यपालिका नीतियाँ बनाती है, जबकि स्थायी कार्यपालिका उन नीतियों को लागू करने का कार्य करती है।

कानूनों का क्रियान्वयन

कार्यपालिका का सबसे महत्वपूर्ण कार्य संसद या विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करना है। यदि कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन न हो, तो उनका कोई व्यावहारिक महत्व नहीं रह जाता।

उदाहरण के लिए, शिक्षा, स्वास्थ्य, कर व्यवस्था और सड़क सुरक्षा से जुड़े कानूनों को लागू करना कार्यपालिका की जिम्मेदारी होती है।

शासन एवं प्रशासन का संचालन

देश के दैनिक प्रशासन का संचालन कार्यपालिका करती है। इसमें विभिन्न मंत्रालयों, विभागों तथा सरकारी संस्थाओं के माध्यम से सरकारी कार्यों का प्रबंधन किया जाता है।

भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय—जैसे गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय—इसी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा हैं।

नीतियों का निर्माण एवं कार्यान्वयन

सरकार देश के विकास के लिए अनेक नीतियाँ बनाती है। इन नीतियों का प्रारूप तैयार करना, उन्हें लागू करना तथा उनके प्रभाव का मूल्यांकन करना कार्यपालिका का प्रमुख कार्य है।

उदाहरण—

  • शिक्षा नीति
  • स्वास्थ्य नीति
  • कृषि नीति
  • औद्योगिक नीति

राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना

देश की आंतरिक एवं बाहरी सुरक्षा बनाए रखना कार्यपालिका का महत्वपूर्ण दायित्व है।

इसी कारण रक्षा बलों, पुलिस प्रशासन तथा सुरक्षा एजेंसियों का संचालन कार्यपालिका के अधीन होता है।

भारत में राष्ट्रपति सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर होते हैं, जबकि रक्षा संबंधी नीतियों का संचालन प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद करती है।

विदेश नीति का संचालन

अन्य देशों के साथ संबंध स्थापित करना, अंतरराष्ट्रीय समझौते करना तथा भारत का प्रतिनिधित्व करना भी कार्यपालिका का महत्वपूर्ण कार्य है।

विदेश मंत्रालय इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वित्तीय प्रशासन

सरकार का बजट तैयार करना, कर संग्रह करना, सार्वजनिक धन का उपयोग करना तथा विकास योजनाओं के लिए संसाधनों का प्रबंधन भी कार्यपालिका की जिम्मेदारी है।

हालाँकि बजट संसद में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन उसकी तैयारी मुख्यतः कार्यपालिका द्वारा की जाती है।

जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन

आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है। सरकार नागरिकों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएँ संचालित करती है।

जैसे—

  • शिक्षा का विस्तार
  • स्वास्थ्य सेवाएँ
  • ग्रामीण विकास
  • सामाजिक सुरक्षा
  • रोजगार संबंधी योजनाएँ

कार्यपालिका के प्रकार

संसदीय कार्यपालिका (Parliamentary Executive)

इस प्रणाली में कार्यपालिका विधायिका के प्रति उत्तरदायी होती है।

मुख्य विशेषताएँ—

  • वास्तविक कार्यकारी शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास होती है।
  • राज्य का प्रमुख और सरकार का प्रमुख अलग-अलग व्यक्ति होते हैं।
  • मंत्रिपरिषद संसद के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
  • संसद का विश्वास खोने पर सरकार को इस्तीफा देना पड़ सकता है।
  • भारत, ब्रिटेन, जापान और कनाडा इस प्रणाली के प्रमुख उदाहरण हैं।

राष्ट्रपति कार्यपालिका (Presidential Executive)

इस प्रणाली में राष्ट्रपति ही राज्य का प्रमुख और सरकार का प्रमुख दोनों होता है।

मुख्य विशेषताएँ—

  • राष्ट्रपति जनता द्वारा निश्चित अवधि के लिए चुना जाता है।
  • कार्यपालिका और विधायिका के बीच शक्तियों का स्पष्ट पृथक्करण होता है।
  • राष्ट्रपति अपने कार्यकाल के दौरान सामान्यतः विधायिका के विश्वास पर निर्भर नहीं रहता।
  • मंत्रिमंडल राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदायी होता है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) राष्ट्रपति प्रणाली का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है।

संसदीय एवं राष्ट्रपति प्रणाली की तुलना

आधार

संसदीय प्रणाली राष्ट्रपति प्रणाली

वास्तविक कार्यकारी प्रमुख

प्रधानमंत्री

राष्ट्रपति

राज्य का प्रमुख

राष्ट्रपति/राजा (औपचारिक)

राष्ट्रपति

सरकार का प्रमुख

प्रधानमंत्री

राष्ट्रपति

विधायिका के प्रति उत्तरदायित्व

हाँ

नहीं

शक्तियों का संबंध

कार्यपालिका और विधायिका में

घनिष्ठ संबंध

शक्तियों का पृथक्करण

सरकार का कार्यकाल

संसद के विश्वास पर निर्भर

निश्चित कार्यकाल

उदाहरण भारत, ब्रिटेन

अमेरिका

 

भारत में संसदीय कार्यपालिका (Parliamentary Executive in India)

भारत ने ब्रिटेन की संसदीय शासन प्रणाली से प्रेरणा लेकर संसदीय कार्यपालिका को अपनाया है। इसका आधार भारतीय संविधान के प्रावधान हैं, जिनका उद्देश्य लोकतांत्रिक, उत्तरदायी और प्रभावी शासन सुनिश्चित करना है। इस व्यवस्था में राष्ट्रपति राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख (Nominal Executive) होते हैं, जबकि प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका (Real Executive) का निर्माण करते हैं।

भारतीय संसदीय प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि कार्यपालिका लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। यदि मंत्रिपरिषद लोकसभा का विश्वास खो देती है, तो उसे पद छोड़ना पड़ता है। इस प्रकार कार्यपालिका पर लोकतांत्रिक नियंत्रण बना रहता है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 74 राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की व्यवस्था करता है। वहीं अनुच्छेद 75 मंत्रियों की नियुक्ति, उनके कार्यकाल तथा लोकसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रावधान करता है।

व्यवस्था में शासन का संचालन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में होता है, जबकि राष्ट्रपति संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार अपने अधिकांश कार्य मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं। यही कारण है कि भारत की संसदीय कार्यपालिका को उत्तरदायी सरकार (Responsible Government)” भी कहा जाता है।

राष्ट्रपति (President) की प्रमुख शक्तियाँ

संविधान के अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत में एक राष्ट्रपति होगा तथा अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की समस्त कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है।

कार्यपालिका संबंधी शक्तियाँ

  • प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं।
  • प्रधानमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं।
  • राज्यपाल, महान्यायवादी, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), चुनाव आयुक्त, वित्त आयोग के अध्यक्ष आदि अनेक उच्च पदों पर नियुक्तियाँ करते हैं।

विधायी शक्तियाँ

  • संसद का सत्र बुलाना तथा स्थगित करना।
  • लोकसभा को भंग करना।
  • संसद द्वारा पारित विधेयकों को स्वीकृति देना।
  • संसद के अवकाश के दौरान अध्यादेश जारी करना (अनुच्छेद 123)।

सैन्य शक्तियाँ

राष्ट्रपति भारत की तीनों सेनाओं (थल, जल एवं वायु सेना) के सर्वोच्च कमांडर होते हैं।

कूटनीतिक शक्तियाँ

राष्ट्रपति भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करते हैं तथा विदेशी राजदूतों की नियुक्ति और मान्यता से जुड़े संवैधानिक कार्य करते हैं।

क्षमादान की शक्ति

अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को दया याचिकाओं पर निर्णय लेने तथा कुछ मामलों में दंड को क्षमा, स्थगित, परिवर्तित या कम करने का अधिकार प्राप्त है।

उपराष्ट्रपति (Vice-President)

भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत में एक उपराष्ट्रपति होगा।

राज्यसभा के पदेन सभापति(Ex-officio)

उवे राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करते हैं तथा सदन में अनुशासन और नियमों का पालन सुनिश्चित करते हैं।

कार्यवाहक राष्ट्रपति

यदि राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाए या राष्ट्रपति अपने दायित्व निभाने में असमर्थ हों, तो उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं, जब तक नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो जाता।

प्रधानमंत्री (Prime Minister) की प्रमुख भूमिकाएँ

प्रधानमंत्री भारत सरकार के वास्तविक कार्यकारी प्रमुख (Real Executive Head) हैं। भारतीय संसदीय प्रणाली में प्रधानमंत्री का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि सरकार का संचालन उनके नेतृत्व में होता है।

राष्ट्रपति उस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं, जिसे लोकसभा में बहुमत प्राप्त हो।

मंत्रिपरिषद के नेता

प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का गठन करते हैं तथा मंत्रियों के विभागों का निर्धारण करते हैं। वे मंत्रियों के बीच समन्वय स्थापित करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर किसी मंत्री से इस्तीफा भी मांग सकते हैं।

सरकार के प्रमुख

सरकार की सभी प्रमुख नीतियों और निर्णयों का नेतृत्व प्रधानमंत्री करते हैं। विभिन्न मंत्रालयों के कार्यों में समन्वय स्थापित करना भी उनकी जिम्मेदारी है।

राष्ट्रपति के प्रमुख सलाहकार

प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद के निर्णयों और सरकारी कार्यों की जानकारी देते हैं तथा राष्ट्रपति को आवश्यक सलाह प्रदान करते हैं।

संसद में नेतृत्व

प्रधानमंत्री संसद में सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं, महत्वपूर्ण नीतियों की घोषणा करते हैं तथा विपक्ष के प्रश्नों का उत्तर देने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व

प्रधानमंत्री देश की विकास योजनाओं, आर्थिक नीतियों, विदेश नीति तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों का नेतृत्व करते हैं।

प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद की धुरी (Pivot) हैं। उनके बिना संसदीय सरकार प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर सकती।

मंत्रिपरिषद एवं मंत्रिमंडल (Council of Ministers and Cabinet)

भारतीय संविधान के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) का गठन किया जाता है। प्रधानमंत्री इसके प्रमुख होते हैं।

मंत्रिपरिषद (Council of Ministers)

मंत्रिपरिषद एक व्यापक संस्था है जिसमें सभी स्तर के मंत्री शामिल होते हैं, जैसे—

  • कैबिनेट मंत्री
  • राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार सहित या बिना)
  • उपमंत्री (ऐतिहासिक रूप से; वर्तमान में प्रायः नियुक्त नहीं किए जाते)
मंत्रिमंडल (Cabinet)
  • मंत्रिमंडल मंत्रिपरिषद का छोटा लेकिन सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। इसमें केवल वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
  • देश के महत्वपूर्ण राजनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा एवं प्रशासनिक निर्णय मुख्यतः मंत्रिमंडल द्वारा लिए जाते हैं।
मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल में अंतर
मंत्रिपरिषद मंत्रिमंडल
सभी श्रेणी के मंत्री शामिल केवल वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री
आकार बड़ा आकार छोटा
संवैधानिक संस्था वास्तविक निर्णय लेने वाला प्रमुख समूह
राष्ट्रपति को सलाह देती है प्रमुख नीतिगत निर्णय लेता है

 

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के संबंध

राष्ट्रपति राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख हैं, जबकि प्रधानमंत्री सरकार के वास्तविक प्रमुख हैं। दोनों के बीच सहयोग और संवैधानिक संतुलन लोकतांत्रिक शासन की सफलता के लिए आवश्यक है।

प्रधानमंत्री का दायित्व है कि वे राष्ट्रपति को सरकार के सभी महत्वपूर्ण निर्णयों, नीतियों और प्रशासनिक मामलों की जानकारी दें। दूसरी ओर राष्ट्रपति आवश्यक होने पर मंत्रिपरिषद से किसी विषय पर पुनर्विचार करने का आग्रह कर सकते हैं। यदि मंत्रिपरिषद पुनः वही सलाह देती है, तो राष्ट्रपति सामान्यतः उस सलाह के अनुसार कार्य करते हैं।

इस प्रकार राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के संबंध प्रतिस्पर्धा के नहीं, बल्कि संवैधानिक सहयोग, सलाह और उत्तरदायित्व पर आधारित होते हैं।

कार्यपालिका (Executive)

स्थायी कार्यपालिका (नौकरशाही)

राजनीतिक कार्यपालिका के अतिरिक्त शासन व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण भाग स्थायी कार्यपालिका (Permanent Executive) है, जिसे सामान्यतः नौकरशाही (Bureaucracy) या सिविल सेवा (Civil Services) कहा जाता है। इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) तथा अन्य केंद्रीय एवं राज्य सेवाओं के अधिकारी शामिल होते हैं।

स्थायी कार्यपालिका की प्रमुख विशेषताएँ
  • यह राजनीतिक रूप से तटस्थ (Neutral) रहती है।
  • संविधान एवं कानून के अनुसार कार्य करती है।
  • सरकार की नीतियों को लागू करती है।
  • प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखती है।
  • राजनीतिक कार्यपालिका को विशेषज्ञ सलाह देती है।
  • जनता तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं को पहुँचाती है।
स्थायी कार्यपालिका का महत्व
  • शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, पर्यावरण, वित्त, रक्षा और डिजिटल प्रशासन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
  • स्थायी कार्यपालिका शासन को प्रभावी, निरंतर और व्यवस्थित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कार्यपालिका की जवाबदेही (Accountability of the Executive)

संसद के प्रति जवाबदेही

भारतीय संसदीय प्रणाली में मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। यदि लोकसभा में सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।

संसद कार्यपालिका पर निम्न माध्यमों से नियंत्रण रखती है—

  • प्रश्नकाल (Question Hour)
  • शून्यकाल (Zero Hour)
  • ध्यानाकर्षण प्रस्ताव
  • अविश्वास प्रस्ताव
  • बजट पर चर्चा
  • संसदीय समितियाँ
न्यायपालिका के प्रति जवाबदेही

यदि कार्यपालिका का कोई निर्णय संविधान के विरुद्ध हो, तो न्यायपालिका उसकी न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) कर सकती है। इससे संविधान की सर्वोच्चता बनी रहती है।

संविधान के प्रति जवाबदेही

कार्यपालिका का प्रत्येक निर्णय संविधान के अनुरूप होना चाहिए। संविधान से ऊपर कोई भी सरकारी संस्था नहीं है।

जनता के प्रति जवाबदेही

लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है। नागरिक चुनावों के माध्यम से सरकार के कार्यों का मूल्यांकन करते हैं और आवश्यक होने पर सरकार बदल सकते हैं। इसलिए कार्यपालिका को जनहित, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करना होता है।

महत्वपूर्ण तथ्य
  • कार्यपालिका सरकार का वह अंग है जो कानूनों को लागू करता है।
  • भारत ने संसदीय शासन प्रणाली (Parliamentary System) अपनाई है।
  • राष्ट्रपति भारत के संवैधानिक प्रमुख हैं।
  • प्रधानमंत्री सरकार के वास्तविक कार्यकारी प्रमुख हैं।
  • अनुच्छेद 52 – भारत में राष्ट्रपति होगा।
  • अनुच्छेद 53 – संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी।
  • अनुच्छेद 74 – राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए मंत्रिपरिषद होगी।
  • अनुच्छेद 75 – मंत्रियों की नियुक्ति एवं लोकसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व।
  • अनुच्छेद 63 – भारत में उपराष्ट्रपति होगा।
  • अनुच्छेद 72 – राष्ट्रपति की क्षमादान संबंधी शक्ति।
  • अनुच्छेद 123 – राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
  • मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
  • मंत्रिमंडल (Cabinet) मंत्रिपरिषद का सबसे महत्वपूर्ण और निर्णय लेने वाला भाग है।
  • स्थायी कार्यपालिका प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखती है।
निष्कर्ष

कार्यपालिका भारतीय लोकतंत्र का वह स्तंभ है जो संविधान की भावना के अनुरूप शासन को व्यवहारिक रूप देता है। विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करना, प्रशासन का संचालन करना, राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करना कार्यपालिका की मुख्य जिम्मेदारियाँ हैं।

भारत की संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख हैं, जबकि प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका के रूप में शासन का संचालन करते हैं।

 FAQs

प्रश्न-1. कार्यपालिका क्या है?

उत्तर- कार्यपालिका सरकार का वह अंग है जो कानूनों को लागू करता है और प्रशासन चलाता है।

प्रश्न-2. भारत में कौन-सी कार्यपालिका प्रणाली अपनाई गई है?

उत्तर- भारत में संसदीय कार्यपालिका प्रणाली अपनाई गई है।

प्रश्न-3. भारत का संवैधानिक प्रमुख कौन होता है?

उत्तर- भारत का संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति होता है।

प्रश्न-4. भारत का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख कौन होता है?

उत्तर- प्रधानमंत्री भारत के वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होते हैं।

प्रश्न-5. अनुच्छेद 74 किससे संबंधित है?

उत्तर- राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए मंत्रिपरिषद से।

प्रश्न-6. अनुच्छेद 75 किससे संबंधित है?

उत्तर- मंत्रियों की नियुक्ति और लोकसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व से।

प्रश्न-7. राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद में है?

उत्तर- अनुच्छेद 123

प्रश्न-8. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति किस अनुच्छेद में दी गई है?

उत्तर- अनुच्छेद 72

प्रश्न-9. उपराष्ट्रपति का प्रमुख कार्य क्या है?

उत्तर- राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में कार्य करना।

प्रश्न-10. मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल में क्या अंतर है?

उत्तर- मंत्रिपरिषद में सभी मंत्री शामिल होते हैं, जबकि मंत्रिमंडल केवल वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों का समूह होता है।

प्रश्न-11. स्थायी कार्यपालिका किसे कहते हैं?

उत्तर- सिविल सेवकों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को स्थायी कार्यपालिका कहा जाता है।

प्रश्न-12. कार्यपालिका किसके प्रति उत्तरदायी होती है?

उत्तर- संविधान, संसद, न्यायपालिका और जनता के प्रति।

प्रश्न-13. लोकसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व का क्या अर्थ है?

उत्तर- यदि लोकसभा सरकार पर विश्वास नहीं रखती, तो पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।

प्रश्न-14. भारत में वास्तविक शासन कौन चलाता है?

उत्तर- प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद।

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