नियोजित विकास की राजनीति

नियोजित विकास की राजनीति

नियोजित विकास की राजनीति का तात्पर्य है उपलब्ध संसाधनों के श्रेष्ठतम प्रयोग के लिए भविष्य की योजनाएं बनाना, नियोजन के माध्यम से उत्पादन में वृद्धि करना, रोजगार के अवसरों में वर्दी करना, साथ ही आर्थिक स्थिरता आदि लक्षणों को प्राप्त करना |

विकास के दो मॉडल

आजादी के समय विकास का पैमाना पश्चिमी देशों को माना जाता था अर्थात आधुनिक होने का अर्थ था पश्चिमी औद्योगिक देशों की तरह होना था |

पूंजीवादी / उदारवादी मॉडल – 

इस मॉडल के अंतर्गत यूरोप के अधिकांश देशों विशेष रूप से अमेरिका में यह मॉडल अपनाया गया था | इस मॉडल के अंतर्गत सभी वस्तुओं का उत्पादन निजी क्षेत्र द्वारा किया जाता है और सरकार का हस्तक्षेप नहीं के बराबर होता है |

समाजवादी मॉडल –

मुख्य रूप से भूतपूर्व सोवियत संघ द्वारा अपनाया गया था इसके अंतर्गत सभी चीजों का उत्पादन सरकार द्वारा किया जाता है | देश में निजी क्षेत्र नहीं के बराबर होता है और सभी कंपनियां सरकार के अधीन ही होती है |

स्वतंत्रता के बाद भारत में अपनी जाने वाले आर्थिक विकास मॉडल से संबंधित सहमति एवं सहमति –

सहमति के क्षेत्र –

  • भारत के विकास का अर्थ था आर्थिक वृद्दि एवं सामाजिक न्याय प्रदान करना |
  • आर्थिक विकास के मुद्दे को केवल व्यापारियों उद्योग पतियों और किसानों पर ही नहीं छोड़ा जा सकता |
  • इस बात पर सहमति बनी की सरकार को प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए ताकि गरीबी उन्मूलन, सामाजिक एवं आर्थिक वितरण के काम को सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी माना जाए |

असहमति के क्षेत्र –

  • यदि आर्थिक विकास से असमानता हो तो न्याय की जरूरत से जुड़े महत्व पर असहमति |
  • उद्योग बनाम कृषि एवं निजी बनाम सार्वजनिक क्षेत्र के मुद्दों पर असहमति |

मिश्रित अर्थव्यवस्था

इस व्यवस्था के अंतर्गत मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था में समाजवाद एवं पूंजीवाद दोनों की विशेषताओं को शामिल किया गया देश में छोटे उद्योगों का विकास निजी क्षेत्र में किया गया | साथ ही बड़े उद्योगों के विकास की जिम्मेदारी सरकारों ने अपने कंधों पर ले ली | इस प्रकार भारतीय राजनीति में मिश्रित अर्थव्यवस्था के मॉडल को अपनाया गया जिसमेंदोनों ही व्यवस्थाओं अर्थात सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र का समावेश किया गया |

पास्को प्लांट

जगत सिंह जिले में प्रस्तावित पोस्को प्लांट – इंडिया इस्पात संयंत्र से विस्थापन का शिकार हुए लोगों ने इस कोरिया कंपनी के दफ्तर के सामने विरोध प्रदर्शन किया, साथ ही लोग मांग कर रहे थे कि 1 साल पहले कंपनी और सरकार के बीच जी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए थे उसे रद्द किया |

नुआंगाँव और गढ़कुजंगा ग्राम पंचायत के 100 से भी ज्यादा स्त्री पुरुषों ने कंपनी के दफ्तर में घुसने की कोशिश की | प्रदर्शनकारियों  अनुसार उनकी मांग थी कि आजीविका और जीवन की कीमत पर कंपनी को इस्पात संयंत्र लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन राष्ट्रीय युवा संगठन एवं नवनिर्माण समिति द्वारा किया गया था  |

वामपंथी

वामपंथियों से तात्पर्य उन लोगों की तरफ संकेत किया जाता है जो गरीब और पिछड़े सामाजिक समूह की तरफदारी करते हैं और इन तत्वों को फायदा पहुंचाने वाली सरकारी नीतियों का समर्थन करते हैं |

दक्षिणपंथी

दक्षिणपंथी से तात्पर्य है खुली प्रतिस्पर्धा और बाजार-मूलक अर्थव्यवस्था के जरिए ही प्रगति हो सकती है अर्थात सरकार अर्थव्यवस्था में गैर जरूरी हस्तक्षेप नहीं करने पर बल दिया जाता है |

बोम्बे प्लान

1944 में उद्योगपतियों की एक समूह ने देश में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का प्रस्ताव दिया जिसके अंतर्गत सरकार औद्योगिक और अन्य आर्थिक क्षेत्र में निवेश के लिए बड़े कदम उठाएगी |

योजना आयोग

योजना आयोग की स्थापना भारत सरकार के एक प्रस्ताव द्वारा मार्च 1950 में की गई थी इसके अंतर्गत भारत के प्रधानमंत्री ही योजना आयोग के अध्यक्ष होते हैं योजना आयोग का मुख्य कार्य है कि भारत अपने विकास के लिए कौन सा रास्ता और रणनीति अपनाएगा यह फैसला करने में इस संस्था ने केंद्रीय और सबसे प्रभावशाली भूमि का निभाई है |

कार्य विधि

  • योजना आयोग के कार्य विधि के अंतर्गत भूतपूर्व सोवियत संघ की तरह भारत के योजना आयोग ने भी पंचवर्षीय योजनाओं का विकल्प चुना था |
  • योजना आयोग के अनुसार केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों के बजट को दो हिस्सों में बांटा गया |
  • एक हिस्सा घर योजना में का था जिसके अंतर्गत सालाना आधार पर दिन दैनिक मुद्दों पर खर्च करना था जबकि दूसरा हिस्सा योजना आदि पर व्यय करने से संबंधि था |

 मुख्य कार्य

  • देश के संसाधनों एवं पूंजी का अनुमान लगाना |
  • विकास की विभिन्न योजना बनाना साथ ही विकास की प्राथमिकता तय करना |
  • विकास संबंधी योजना के बाधक कारकों का पता लगाना |
  • प्रगति की योजनाओं का मूल्यांकन करना |
नीति आयोग
  • योजना आयोग के स्थान पर 1 जनवरी, 2015 को की गई थी
  • अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री ही होते हैं |
  • नीति शब्द का विस्तार रूप है – “नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया” |
राष्ट्रीय विकास परिषद
  • राष्ट्रीय विकास परिषद की स्थापना 6 अगस्त,1952 में की गई थी |
  • योजना आयोग के निर्माण में राज्य की भागीदारी हो |
  • देश की पंचवर्षीय योजना का अनुमोदन करना |
  • प्रधानमंत्री ही इसके अध्यक्ष होते हैं साथ ही भारत के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री एवं योजना आयोग के सदस्य भी इसके सदस्य होते हैं |
प्रथम पंचवर्षीय योजना

प्रथम पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत निम्नलिखित बिंदुओं को मुख्य रूप से देखा जा सकता है

  • यह योजना 1951 से 1956 तक थी |
  • इस योजना के अंतर्गत सबसे ज्यादा जोर “कृषि” पर दिया गया था |
  • इस योजना के अंतर्गत “बांध एवं सिंचाई” के क्षेत्र में निवेश किया गया |
  • भाखड़ा नांगल परियोजना इनमें से एक महत्वपूर्ण परियोजना थी |
दूसरी पंचवर्षीय योजना

दूसरी पंचवर्षीय योजना को निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है-

  • यह योजना 1956 से 1961 तक थी |
  • इस योजना में “उद्योगों के विकास” पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया |
  • सरकार ने देशी “उद्योगों को संरक्षण” देने के लिए आयात पर भारी शुल्क लगाया |
  • इस योजना के योजनाकार पी.सी. महालनोविस थे |
विकास का केरल मॉडल
  • विकास के केरल मॉडल में विकास और नियोजन के लिए अपनाए गए इस मॉडल में मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि, खाद्य्य वितरण और गरीबी उन्मूलन पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया यही केरल मॉडल के नाम से जाना जाता है |
  • जैसी कुमारप्पा जैसे गांधीवादी अर्थशास्त्रियों ने विकास की वैकल्पिक योजना प्रस्तुत की जिसमें “ग्रामीण औद्योगीकरण” पर सबसे ज्यादा बोल दिया गया |
  • चौधरी चरण सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था के नियोजन में “कृषि” को केंद्र में रखने की बात प्रभावशाली तरीके से उठाई थी |
  • भूमि सुधार के अंतर्गत जमींदारी प्रथा को समाप्त करना, जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों को एक साथ करना अर्थात चकबंदी करना एवं जो काश्तकार किसी दूसरे की जमीन कटाई पर जोत हो रहे थे उन्हें कानूनी सुरक्षा प्रदान करना एवं भूमि स्वामित्व सीमा कानून का निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए |
  • 1960 के दशक में भयंकर अकाल के कारण कृषि की दशा ख़राब हो गई थी खाद्य संकट के कारण गेहूं का आयात करना पड़ा था |
हरित क्रांति

सरकार ने खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण नई रणनीति अपनाई जो कि हरित क्रांति के नाम से जानी जाती है इसके अंतर्गत उन इलाकों पर सबसे ज्यादा संसाधन लगाने का निर्णय लिया गया जहां सिंचाई सुविधा मौजूद थी साथ ही किसान समृद्ध थे |

उच्च गुणवत्ता के बीच उर्वरक, कीटनाशक और बेहतर सिंचाई सुविधा बड़े अनुदानित मूल्य पर मुहैया कराना शुरू किया उपज को एक निर्धारित मूल्य पर खरीदने की गारंटी दी गई इन संयुक्त पर प्रयासों को ही हरित क्रांति के नाम से जाना जाता है इस क्रांति के जनक एम.एस. स्वामीनाथन को कहा जाता है |

सकारात्मक प्रभाव
  • खेती की पैदावार में बढ़ोतरी होना |
  • गेहूं की पैदावार में बढ़ोतरी होना |
  • हरियाणा पंजाब पश्चिम उत्तर प्रदेश जैसे इलाके समृद्ध हुए |
  • किसने की स्थिति में सुधार हुआ |
नकारात्मक प्रभाव
  • सामाजिक एवं क्षेत्रीय समानताएं बढ़ना |
  • हरित क्रांति के कारण गरीब किसान और बड़े भूस्वामी के बीच भारी अंतर पड़ा, जिससे वामपंथी संगठनों का उदय हुआ |
  • मध्यम श्रेणी के भू स्वामित्व वाले किसान का उभार हुआ |
श्वेत क्रांति
  • “मिल्क मैन ऑफ इंडिया” के नाम से मशहूर “वर्गीज कुरियन” ने गुजरात सहकारी दुग्ध एवं विपणन परिषद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी
  • और अमूल की शुरुआत की थी जिसमें लगभग गुजरात के 25 लाख दूध उत्पादक जुड़े इस मॉडल को ही श्वेत क्रांति के नाम से जाना जाता है|
निष्कर्ष

भारत में नियोजित विकास की राजनीति का उद्देश्य स्वतंत्रता के बाद देश के आर्थिक और सामाजिक पुनर्निर्माण को दिशा देना था | पंडित नेहरू के नेतृत्व में योजना आयोग की स्थापना की गई और पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से औद्योगिकरण, कृषि, विकास, रोजगार और क्षेत्रीय संतुलन पर ध्यान दिया गया |

नियोजित विकास से देश में आधारभूत ढांचे का विस्तार हुआ सार्वजनिक क्षेत्र मजबूत हुआ साथ ही गरीबी कम करने के प्रयास हुए लेकिन समय के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन में असमानता संसाधनों की कमी और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसी समस्याएं भी सामने आई |

अंततः नियोजित विकास की राजनीति ने भारत को आर्थिक विकास की नई दिशा प्रदान दी परंतु बदलती परिस्थितियों के अनुसार नीतियों में सुधार और संतुलन संतुलित विकास की आवश्यकता बनी रही है |

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