अंतर्राष्ट्रीय संगठन || संयुक्त राष्ट्र संघ नोट्स

अंतरराष्ट्रीय संगठन

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अंतरराष्ट्रीय संगठन अपने उद्देश्यों में व्यापक होते हैं जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादों के समाधान एवं शांतिपूर्ण सुरक्षा स्थापित करने में दुनिया के सभी देशों के मध्य सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं |

राष्ट्र संघ (लीग ऑफ नेशन)

“लीग ऑफ़ नेशन” अर्थात “राष्ट्र संघ” की स्थापना – आधिकारिक तौर पर 10 जनवरी, 1920 को प्रथम विश्व युद्ध के बाद की गई थी इसका मुख्य उद्देश्य – अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना था | लेकिन यह संगठन अपने उद्देश्य को प्राप्त करने में असफल रहा, जिसके कारण 20 अप्रैल, 1946 को इसे आधिकारिक तौर पर समाप्त (बंद) कर दिया गया इसका मुख्यालयस्विट्जरलैंड के जिनेवा में स्थित था  |

संयुक्त राष्ट्र संघ का विकास

प्रथम विश्व युद्ध के बाद युद्ध को रोकने के लिए बनी संस्था “राष्ट्र संघ” अर्थात “लीग ऑफ नेशन” के असफल होने के कारण और 1939 से 1945 तक चले दूसरी विश्व युद्ध के पश्चात अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा स्थापित करने के लिए पुन: एक अंतरराष्ट्रीय संगठन की आवश्यकता महसूस की गई थी |

अंतरराष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता

अंतरराष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता को निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है-

  • अंतर्राष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना |
  • दुनिया के आर्थिक विकास में सहायता प्रदान करना |
  • वैश्विक स्तर पर सहयोग को बढ़ावा देना |
  • वैश्विक स्तर पर हो रहे युद्ध की रोक-थाम में भूमिका निभाना |
  • वैश्विक स्तर पर आई प्राकृतिक आपदाएं, मनहरियों आदि का निपटारा करना |

संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना

24 अक्टूबर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी स्थापना के समय संयुक्त राष्ट्र संघ के 51 सदस्य थे और भारत भी इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल था जो की 30 अक्टूबर 1945 को इसका सदस्य बना | वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्यों की संख्या 193 है दक्षिणी सूडान 193 वां सदस्य देश है | इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित है |

यू एन ओ के उद्देश्य एवं सिद्धांत

  • अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना |
  • सभी देशों के बीच मैत्री-पूर्ण संबंधों को बढ़ावा देना |
  • आपसी सहयोग द्वारा आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, तथा मानवीय ढंग की अंतरराष्ट्रीय समस्याओं को हल करना |
  • अंतरराष्ट्रीय संधियों एवं अंतर्राष्ट्रीय कानून को सम्मानपूर्वक लागू करवाना |
  • सभी देशों की प्रादेशिक अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का आदर करना |

संरचना और उनके कार्य

संयुक्त राष्ट्र संघ की संरचना अर्थात अंगों को निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है-

  • महासभा – इसके सदस्यों की संख्या 193 है इसका मुख्यालय – न्यूयॉर्क में है एवं इसका उद्देश्य सदस्य देशों का प्रवेश एवं निलंबन के साथ ही बजट पारित करना है |
  • सुरक्षा परिषद – पांच स्थाई एवं 10 अस्थाई सदस्य मुख्यालय न्यूयॉर्क प्रमुख उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा कायम रखना साथ ही आवश्यकता पड़ने पर सैन्य कार्यवाही करना |
  • सामाजिक एवं आर्थिक परिषद – इसके सदस्यों की संख्या 54 है | इसका मुख्यालय – न्यूयॉर्क में है और इसका मुख्य उद्देश्य – आर्थिक, सामाजिक, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदि विषयों पर विचार कर महासभा को रिपोर्ट भेजना होता है |
  • सचिवालय – महासचिव एवं अन्य कर्मचारी इसके सदस्य होते हैं जबकि इसका मुख्यालय – न्यूयॉर्क में स्थित है | इस अंग का मुख्य कार्य संयुक्त राष्ट्र के नित्य कार्यों का संचालन करना होता है |
  • अंतरराष्ट्रीय न्यायालय – इसके अंतर्गत 15 न्यायाधीश होते हैं इसका मुख्यालय – हॉलैंड के हेग नगर में स्थित है जबकि इसका मुख्य कार्य – सभी सदस्य देशों के पारस्परिक विवाद, आपसी झगड़े, क्षेत्रीय एवं सीमा विवादों पर विचार विमर्श करना |
  • न्यासिता परिषद – महासभा द्वारा चयनित सदस्य इसका मुख्यालय – न्यूयॉर्क में है | जबकि इसका मुख्य उद्देश्य – विशेष क्षेत्र की सामाजिक, आर्थिक उन्नति (1994 से इसे समाप्त कर दिया गया) |

भारत और संयुक्त राष्ट्रसंघ

चाहे वह शांति एवं सुरक्षा का विषय हो या फिर निशस्त्रीकरण का हो या फिर दक्षिण कोरिया संकट हो, स्वेज नहर का मामला हो या इराक का कुवैत पर आक्रमण हो इन सभी के साथ-साथ भारत ने मानवाधिकारों की रक्षा, उपनिवेशवाद, रंगभेद का विरोध करना तथा शैक्षिक आर्थिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भी भारत की महत्वपूर्ण भूमिका बनी रही है |

भारत की दावेदारी के प्रमुख आधार

संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी के प्रमुख आधारों को निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है-

  • भारत सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश |
  • भारतमें लोकतंत्र का स्थाई होना |
  • मानवाधिकारों का सम्मान |
  • तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था |
  • संयुक्त राष्ट्र संघ के बजट में नियमित योगदान देना |
  • अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा में भारत का महत्वपूर्ण योगदान होना |

विस्तार की आवश्यकता 

संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन 24 अक्टूबर, 1945 को किया गया था चार्टर के अनुसार सुरक्षा परिषद की प्राथमिक जिम्मेदारी अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का ख्याल रखना था | जिसमें कुल 15 सदस्य देश थे 5 स्थाई एवं 10 स्थाई सदस्य भारत 2021 में सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्य के रूप में 8 वीं बार अपना कार्यकाल पूरा किया था | मौजूदा स्थाई सदस्यों में प्रत्येक के पास सुरक्षा परिषद के निर्णय पर वीटो का अधिकार होता है सुरक्षा परिषद का एक मात्र सुधार 1965 में हुआ था तब इसके अस्थाई सदस्यों की संख्या 6 से बढ़कर 10 कर दी गई थी |

सुधार की आवश्यकता

  • 1992 में संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा में एक प्रस्ताव स्वीकार किया गया जिसमें सुरक्षा परिषद के विस्तार और सुधार की आवश्यकता पर बोल दिया गया |
  • सुरक्षा परिषद अब राजनीतिक वास्तविकताओं की नुमाइंदगी नहीं करती |
  • सुरक्षा परिषद के फैसलों पर पश्चिमी मूल्य और हितों की छाप होती है और इन फैसलों पर चंद देशों का ही दबदबा होता है |
  • सुरक्षा परिषद में बराबर का प्रतिनिधित्व नहीं होता है |
  • उपरोक्त मांगों के फल स्वरुप ही 1997 में संयुक्त राष्ट्र संघ के उस समय के महासचिव कॉफी अन्नान ने जाँच शुरू कराई कि इसे सुधार कैसे कराया जाए इसके बाद के
सुरक्षा परिषद की स्थाई और अस्थाई सदस्य देशों के लिए मानदंड तय
  • आबादी की दृष्टि से सबसे बड़ा राष्ट्र होना |
  • देश में स्थायी लोकतंत्र और मानवाधिकारों के प्रति निष्ठा का होना |
  • उभरती हुई आर्थिक ताकत के रूप में होना |
  • संयुक्त राष्ट्र संघ के बजट में लगातार महत्वपूर्ण योगदान देना |
  • अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बहाली में योगदान होना |
  • ऐसा देश जो लोकतंत्र और मानवाधिकारों का सम्मान करता हो |
  • ऐसा देश अपने भूगोल, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के लिए आज से विश्व की विविधता की नुमाइंदगी करता हो |

उपरोक्त सभी शर्तों को भारत पूरा करता है संक्षेप में सभी विकसित और विकासशील देश सुरक्षा परिषद में सुधार का समर्थन करते हैं और इसके स्थाई एवं स्थाई सदस्यों की संख्या में वृद्धि करना चाहते हैं परंतु विकसित देशों का मानना है कि विकासशील देश संयुक्त राष्ट्र संघ के बजट में अपना अंशदान अधिक करें और नए स्थाई सदस्यों को वीटो का अधिकार देने पर सहमति नहीं है नहीं है जबकि विकासशील देश स्थाई सदस्य के साथ ही वीटो अधिकार की भी मांग करते हैं |

संयुक्त राष्ट्र संघ को एक ध्रुवीय विश्व में अधिक प्रासंगिक बनाने के उपाय
  • अंतर्राष्ट्रीय शांति संस्थापक आयोग का गठन करना |
  • मानवाधिकार परिषद की स्थापना करना |
  • विकास लक्ष्य को प्राप्त करने पर सहमति |
  • एक लोकतंत्र कोष का गठन करना |
  • आतंकवाद के सभी रूपों की आलोचना करना |
संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रमुख एजेंसी
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ)

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो उन वित्तीय संस्थानों और नियमों को बनता है जो वैश्विक स्तर पर कार्य करते हैं | इसके अंतर्गत 189 सदस्य देश हैं लेकिन सभी को बराबर का अधिकार नहीं है जी7 के देश अर्थात अमेरिका, जापान, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, कनाडा, आदि के पास 41% वोट है | जबकि चीन, भारत, रूस, ब्राजील, और सऊदी अरब भी इसके प्रमुख सदस्यों में से एक हैं |

वर्ल्ड बैंक (World Bank)

इसकी स्थापना दूसरे विश्व के दौरान 1944 में की गई थी | इसकी गतिविधियां प्रमुख रूप से विकासशील देशों पर केंद्रित होती है | यह प्रदूषण में कमी के रूप में मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, सरकारी सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण, जैसे ग्रामीण विकास के लिए काम करता है अर्थात सड़क, शहरी उत्थान, बिजली और शासन, भ्रष्टाचार विरोधी कानूनी संस्थाओं का विकास यह सदस्य देशों को ऋण और अनुदान प्रदान करता है | इस प्रकार यह संगठन विकासशील देशों की आर्थिक नीतियों पर अत्यधिक प्रभाव डालता है |

विश्व व्यापार संगठन (WTO)

यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो वैश्विक व्यापार के लिए नियम निर्धारित करता है इस संगठन की स्थापना ट्रेड एंड टैरिफ फॉर जनरल एग्रीमेंट” के उत्तराधिकारी के रूप में की गई थी | यह संगठन दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनाया गया था इसमें 164 सदस्य देश हैं | सभी निर्णय मंत्री स्तरीय सम्मेलन द्वारा लिए जाते हैं | लेकिन अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान जैसे प्रमुख आर्थिक शक्तियों ने अपने हितों को आगे और विश्व व्यापार के नियमों को बनाने में किया है |

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)

संयुक्त राष्ट्र संघ काएक महत्वपूर्ण निकाय है, जिसकी स्थापना स्विट्जरलैंड के जिनेवा में 1919 में की गई थी | इसका मुख्य उद्देश्य – सामाजिक न्याय की कुशल स्थितियों को प्रोन्नत करने तथा अंतर्राष्ट्रीय श्रम मांगों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर श्रमिकों के लिए कार्य करना होता है |

अंतर्राष्ट्रीय आणविक ऊर्जा एजेंसी (IAEA)

इसकी स्थापना 1957 में की गई थी | इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियना में स्थित है | इस संगठन का मुख्य कार्य अमेरिकी राष्ट्रपति आइजन होवर के प्रस्ताव शांति के लिए परमाणु को लागू करना है | यह है परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और सैन्य उद्देश्यों के लिए इसके उपयोग को रोकने के लिए कार्य करता है |

गैर सरकारी संगठन
एमनेस्टी  इंटरनेशनल

एमनेस्टी इंटरनेशनल एक ऐसी संस्था है जो पूरी दुनिया में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अभियान चलता है | यह संगठन मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा में सभी मानव अधिकारों के लिए सम्मान को बढ़ावा देता है | यह मानता है कि मानवाधिकार न्यायोचित और अविभाज्य है यह मानव अधिकारों पर रिपोर्ट तैयार और प्रकाशित करता है |

ह्यूमन राइट वॉच

ह्यूमन राइट वॉच एक अन्य अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन है | जो मानव अधिकारों के अनुसंधान और वकालत में शामिल है | यह अमेरिका में सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन है | यह मानवाधिकारों के हनन की और वैश्विक मीडिया का ध्यान आकर्षित करता है | इसने बारूदी सुरंग पर प्रतिबंध लगाने वाले अभियानों बाल सैनिकों के उपयोग को रोकने और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना जैसे कार्यों में मदद की है |

निष्कर्ष

अंतरराष्ट्रीय संगठन विश्व में शांति, सहयोग और विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जैसे – यूनाइटेड नेशन, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, वर्ल्ड बैंक, इंटरनेशनल मोनेटरी फंड, आदि संगठन देश के बीच आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक सहयोग, को मजबूत करते हैं | यह संगठन वैश्विक समस्याओं जैसे – अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, गरीबी, महामारी, जलवायु परिवर्तन और संघर्ष का सामूहिक समाधान खोजने में सहायता प्रदान करते हैं | अतः अंतरराष्ट्रीय संगठन वैश्विक स्थिरता और मानव कल्याण के लिए अत्यंत ही आवश्यक है |

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