सोवियत प्रणाली क्या है
सोवियत प्रणाली से तात्पर्य है एक ऐसी प्रणाली जो केंद्रीकृत योजना राज्य के नियंत्रण पर आधारित और साम्यवादी व्यवस्था द्वारा निर्देशित प्रणाली को ही सोवियत प्रणाली के नाम से जाना जाता है जो की एक तरह से सोवियत संघ में समतावादी समाज के निर्माण के लिए ही बनाई गई थी|
सोवियत प्रणाली की विशेषता
सोवियत प्रणाली की विशेषताओं को निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है –
- सोवियत प्रणाली मुख्य रूप से पूंजीवादी व्यवस्था के विरोध एवं समाजवाद के आदर्शों पर आधारित थी|
- सोवियत प्रणाली में एक तरीके से नियोजित अर्थव्यवस्था पर जोर दिया गया था|
- साम्यवादी प्रणाली में मुख्य रूप से साम्यवादी पार्टी का दबदबा था|
- साम्यवादी प्रणाली अर्थात न्यूनतम जीवन स्तर की सुविधा सभी नागरिकों को उपलब्ध करवाई|
- इस व्यवस्था के अंतर्गत बेरोजगारी नहीं के बराबर थी|
- सोवियत प्रणाली में उन्नत संचार प्रणाली पर बल दिया गया था|
- इस प्रणाली में प्रमुख रूप से राज्य का स्वामित्व था|
- इस प्रणाली में उत्पादन के साधनों पर भी राज्य का पूर्णता नियंत्रण था|
सोवियत प्रणाली के कारण
सोवियत प्रणाली के कारणों को निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है –
- इसके अंतर्गत नागरिकों की आकांक्षाओं कोपूरा ना हो पाना क्योंकि जैसी आशाएं की गई थी उन आशाओं पर यह सोवियत प्रणाली खरी नहीं उतर पाई थी|
- सोवियत प्रणाली के अंतर्गत नौकरशाही का दबदबा ज्यादा बढ़ गया था|
- साम्यवादी पार्टी का राजनीति पर अंकुश हावी हो गया था|
- संसाधनों का अधिकतम उपयोग जो किया गया था वह परमाणु हथियारों पर ज्यादा कर दिया गया|
- सूचना और प्रौद्योगिकी ढांचे में पश्चिमी देशों की तुलना में भूतपूर्व शोध संघ काफी पीछे रह गया था|
- गोर्बाचोव द्वारा किए गए सुधारो का विरोध होना|
- भूतपूर्व सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था का गतिरोध होना, साथ ही उपभोक्ता वस्तुओं की कमी का होना|
- राष्ट्रवादी भावनाओं और संप्रभुता की इच्छा का उभार होना|
- सोवियत प्रणाली का सत्तावादी होना|
- साम्यवादी पार्टी का जनता के प्रति जवाब देह ना होना|
सोवियत संघ के विघटन के परिणाम
भूतपूर्व सोवियत संघ के विघटन के परिणामों को निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है-
- अमेरिका और भूतपूर्व शोध संघ के मध्यशीत युद्ध का जो संघर्ष था वह समाप्त हो गया|
- एक ध्रुवीय विश्व व्यवस्था में बदलना अर्थात अमेरिका का वर्चस्व बढ़ाना|
- दो ध्रुव के मध्य जो हथियारों के होड़ थी उसका खात्मा होना|
- भूतपूर्व सोवियत संघ का बिखराव होना और 15 नए देशों का उदय होना|
- भूतपूर्व सोवियत संघ का उत्तराधिकारी के रूप में रूस का उदय होना|
- दुनिया की राजनीति में शक्ति संघर्ष में परिवर्तन का होना|
- समाजवादी व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगना|
- पूंजीवादी व्यवस्था का वर्चस्व बढ़ाना|
उपरोक्त कारण और परिणाम के आधार पर यह कहा जा सकता है कि भूतपूर्व सोवियत संघ के विघटन के बाद दुनिया में अमेरिका की धमक एक ध्रुवीय विश्व व्यवस्था के रूप में सामने आई और यह भी कहा जा सकता है कि इस एक ध्रुवीय विश्व व्यवस्था में सभी शक्तियों का एक तरीके से केंद्रीयकरण हो चुका था
अर्थात सारी शक्तियां अमेरिका के इर्द-गिर्द ही घूमने लगी और दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय शक्ति संघर्षों में बदलाव हुआ, पूंजीवादी व्यवस्था का प्रचार प्रचार हुआ, साम्यवादी व्यवस्था कमजोर हुई और उदारवादी लोकतांत्रिक व्यवस्था का मजबूत होना भी एक अच्छा संकेत था|