शॉक थेरेपी (Shock Therapy) क्या थी?
शॉक थेरेपी का शाब्दिक अर्थ है – “आघात पहुंचाकर उपचार करना”
साम्यवाद के पतन के बाद भूतपूर्व शोषण के गणराज्य एक सत्तावादी समाजवादी व्यवस्था से लोकतांत्रिक पूंजीवादी व्यवस्था तक के कष्ट कारक संक्रमण से होकर गुजर रहे थे रूस, मध्य एशिया के गणराज्य और पूर्वी यूरोप के कई देशों में पूंजीवादी व्यवस्था की ओर संक्रमण का यह एक खास मॉडल था जिसे शॉक थेरेपी के नाम से जाना जाता है यह मॉडल मुख्य रूप से “अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष” एवं “विश्व बैंक” द्वारा निर्देशित था|
शॉक थेरेपी की विशेषताएं
शॉक थेरेपी की विशेषताओं को मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं में मोटे तौर पर देखा जा सकता है-
- शॉक थेरेपी के अंतर्गत मलकियत का प्रमुख रूप से निजी स्वामित्व पर बल दिया गया|
- राज्य की संपदा का निजीकरण किया गया|
- सामूहिक फॉर्म की जगह निजी फॉर्म को जगह दी गई|
- शॉक थेरेपी के अंतर्गत मुक्त व्यापार व्यवस्था को अपनाया गया|
- मुद्राओं की आपसी परिवर्तनीयता प्रबल दिया गया|
- पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था से जुड़ाव पर बल दिया गया|
- पूंजीवाद के अतिरिक्त किसी भी वैकल्पिक व्यवस्था को इसमें स्वीकार नहीं किया गया था|
शॉक थेरेपी के परिणाम
शॉक थेरेपी के परिणामों को निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है-
- रूस का औद्योगिक ढांचा पूरी तरीके से चरमरा गया था|
- शॉक थेरेपी के कारण आर्थिक परिणाम अनुकूल नहीं आ रहे थे|
- इसके अंतर्गत रुसी मुद्रा रूबल में भारी गिरावट देखने को मिली|
- समाज कल्याण की जो पुरानी व्यवस्था थी उसका अंत हो गया|
- शॉक थेरेपी को विश्व की सबसे बड़ी गैराज शहर कहा गया अर्थात 90% उद्योगों को निजी हाथों में ओनें पौनें दामों में बेचा गया था|
- इस व्यवस्था के अंतर्गत आर्थिक विषमता देखने को मिली|
- शॉक थेरेपी के कारण खाद्यान्नों का संकट उत्पन्न हो गया|
- इस व्यवस्था में माफिया वर्ग का नवीन उदय हुआ|
निष्कर्ष:
उपरोक्त बिन्दुओं के आधार पर कहा जा सकता है कि शॉक थेरेपी को सबसे बेहतर तरीका नहीं माना जाता क्योंकि इसके भयंकर दुष्परिणाम, जैसे भारी आर्थिक व सामाजिक संकट, बहुत व्यापक थे। अनेक विशेषज्ञों का मानना है कि धीमी व नियंत्रित सुधार (Gradual Reform) ज्यादा कारगर और समाज के लिये कम कष्टदायक होते।