मौलिक अधिकारों का अर्थ –
मौलिक अधिकारों से तात्पर्य है सामाजिक जीवन की वह परिस्थितियां जिनके बिना कोई भी व्यक्ति अपना विकास नहीं कर सकता अर्थात अधिकार वह हक है जो एक आदमी को जीवन जीने के लिए चाहिए जिसकी वह मांग करता है,साथ ही कानून द्वारा प्रदत्त सुविधाएं उन अधिकारों की रक्षा करती है |
अधिकारों का महत्व
अधिकारों के महत्व को निम्नलिखित बिंदुओं के अंतर्गत समझा जा सकता है जैसे –
सुरक्षा और स्वतंत्रता का होना – अर्थात अधिकार वह अभिव्यक्ति है जिससे व्यक्ति को भाषण, अभिव्यक्ति और जीवन जीने की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं ताकि व्यक्ति अपना जीवन भय मुक्त होकर जी सके |
कमजोर वर्गों की रक्षा करना – अधिकारों के माध्यम से अल्पसंख्यक और समाज के कमजोर वर्गों के हितों का संरक्षण किया जा सकता है ताकि सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिल सके |
सामाजिक न्याय और समानता का होना – अधिकार के माध्यम से जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव को रोका जा सकता है और कानून के समक्ष सबको बराबर का दर्जा दिया जाता है |
सरकार पर अंकुश – मौलिक अधिकार राज्य को निरंकुश होने से भी रोकते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि सरकार नागरिकों के हितों के खिलाफ किसी भी प्रकार का कोई कार्य नहीं करेगी |
सामाजिक स्थिरता और एकता के लिए आवश्यक – अधिकार के माध्यम से अर्थात जब लोगों को उनके अधिकार मिलते हैं तो समाज में शांति, विश्वास एवं भाई-चारा बना रहता है जो कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है |
व्यक्तित्व का विकास होना – अर्थात अधिकार वह पूंजी है जिनके माध्यम से शिक्षा, अभिवृत्ति और समानता के अधिकार द्वारा अपनी वैचारिक,नैतिक और आध्यात्मिक क्षमता को प्राप्त किया जा सकता है |
संवैधानिक उपचारों काअधिकार – संवैधानिक उपचार के अधिकार के माध्यम से ही यदि किसी व्यक्ति या समाज, संस्था के अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति मेंउ नको न्यायिक उपचार भारतीय संविधान द्वारा दिया गया है जो कि अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय एवं अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के माध्यम से उन्हें लागू करने की गारंटी देता है |
अधिकारों का घोषणा पत्र
अधिकारों का घोषणा पत्र एक औपचारिक दस्तावेज है जो नागरिकों के मौलिक और प्राकृतिक अधिकारों को स्पष्ट करता है साथ ही राज्य को उनकी रक्षा के लिए बाध्य करता है एवं यह संवैधानिक व्यवस्था में स्वतंत्रता, न्याय, समानता आदि का आधारभूत ढांचा प्रदान करता है
विभिन्न घोषणा पत्र
- 1689 का इंग्लैंड का “बिल ऑफ राइट” |
- 1789 की फ्रांस की मानवाधिकार घोषणा |
- 1948 की संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकारों की घोषणा |
अधिकारों की मुख्य विशेषताएँ
राज्य पर नियंत्रण – अधिकारों के माध्यम से ही राज्यों पर नियंत्रण रखा जा सकता है यह नागरिकों का अधिकारों को उल्लंघन करने से सरकार को रोकता है और शासन को शासन पर यह दायित्व डालता है कि किसी भी तरीके से लोगों के अधिकारों का उल्लंघन ना हो |
मूलभूत स्वतंत्रता की गारंटी – अधिकार वह दस्तावेज हैं, जो की जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति, सुरक्षा, के अधिकारों की हमें गारंटी प्रदान करते हैं |
संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करना – मौलिक अधिकारों के माध्यम से ही उल्लंघन की स्थिति में घोषणा पत्र के माध्यम से ही संवैधानिक उपचारों का अधिकार मिलता है जिससे न्यायपालिका के माध्यम से उपचार किया जा सकता है |
1789 का फ्रांसीसी घोषणा पत्र – इस घोषणा पत्र के माध्यम से जो स्वतंत्रता, संपत्ति, सुरक्षा और उत्पीड़न के प्रतिरोध को बुनियादी अधिकार मानता है |
1689 का बिल ऑफ राइट – बिल ऑफ राइट्स ब्रिटिश संसद द्वारा तैयार किया गया था जिसने राजा की शक्तियों को सीमित किया था |
1948 मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा – 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा पत्र को लागू किया गया जो कि वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों के लिए मानक तय करती है इस घोषणा पत्रके साथ-साथ विविधता का सम्मान किया जाता है
अर्थात आधुनिक घोषणा पत्र जैसे जाति, रंग, लिंग, भाषा, धर्म,के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित किया गया है ऐसी घोषणा पत्र मानवाधिकारों की सुरक्षा, व्यक्तियों और समूह को अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए भी सशक्त बनाते हैं |