भारतीय संविधान क्यों और कैसे || bhartiya samvidhan kyu or kaise

भारतीय संविधान क्या है ?

भारतीय संविधान कैसे बना विभिन्न देशों के संविधानों से हमने क्या-क्या प्रावधान लिए आदि को निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है –

  • जनता की विशिष्ट आकांक्षाओं को पूरा करने का साधन |
  • राजनीतिक प्रक्रिया के मूल ढांचे का निर्धारक होना |
  • सरकार और जनता के बीच संबंधों का विनियमन होना |
  • सरकार के तीन प्रमुख अंगों जैसे विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की स्थापना |

संविधान की आवश्यकता क्यों है?

इसको हम निम्नलिखित बिंदुओं में देखा जा सकता है-

  • मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में विभिन्न प्रकार के समुदायों से बनता है इन समुदायों में तालमेल बिठाने के लिए संविधान का होना जरूरी है |
  • संविधान जनता में आपसी विश्वास पैदा करने के लिए मूलभूत नियमों का समूह उपलब्ध करवाता है |
  • संविधान यह भी तय करता है कि अंतिम निर्णय लेने की जो शक्ति है वह किसके पास रहेगी |
  • संविधान हमें यह भी बताता है कि सरकार निर्णय के नियमों और उप नियमों और उसकी शक्तियों एवं सीमाओं को तय करता है |
  • न्याय पूर्ण समाज की स्थापना के लिए भी हमें संविधान की आवश्यकता होती है |

भारतीय संविधान सभा का गठन

भारतीय संविधान सभा का गठन नवंबर, 1946 में “कैबिनेट मिशन योजना” के तहत किया गया था | इस संविधान सभा का मुख्य उद्देश्य – स्वतंत्र भारत के लिए एक संविधान तैयार करना था | इस संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई थी, जिसमें डॉक्टर “सच्चिदानंद सिन्हा” को अस्थाई एवं 11 दिसंबर, 1946 को “डॉ राजेंद्र प्रसाद” को स्थाई अध्यक्ष चुना गया इस प्रकार संविधान निर्माण में कुल 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था |

संविधान सभा के गठन की महत्वपूर्ण विशेषताएं

संविधान सभा के गठन की महत्वपूर्ण विशेषताओं को निम्नलिखित बिंदुओं में रेखांकित किया जा सकता है-

  • गठन का आधार- संविधान सभा के गठन का आधार कैबिनेट मिशन योजना 1946 के तहत अप्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा किया गया था |
  • सदस्यों की संख्या- संविधान सभा में शुरुआत में 389 सदस्य थी, लेकिन विभाजन के बाद पाकिस्तान के सदस्य अलग हो गए और इस प्रकार भारत की संविधान सभा में कुल सदस्य संख्या 299 रह गई थी |
  • प्रथम बैठक- संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई थी यद्धपि इसमें मुस्लिम लीग ने संविधान सभा का बहिष्कार किया था |
  • अस्थायी अध्यक्ष- संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष “डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा” 9 दिसंबर, 1946 को बनाया गया था |
  • स्थायी अध्यक्ष- संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष “डॉ राजेंद्र प्रसाद” 11 दिसंबर, 1946 को बनाया गया था |
  • संवैधानिक सलाहकार- संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार के रूप में “बी एन राव” की नियुक्ति की गई थी |
  • उद्देश्य प्रस्ताव- संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव 13 दिसंबर, 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा पेश किया गया था |
  • अंतिम सत्र- संविधान सभा का अंतिम सत्र 24 जनवरी, 1950 को था |

इस प्रकार संविधान सभा ने 26 नवंबर, 1949 को अपना काम पूरा किया और संविधान को 26 जनवरी, 1950 को पूरी तरह से लागू कर दिया गया |

संविधान सभा का निर्माण कैसे हुआ

संविधान सभा के निर्माण के प्रमुख चरणों एवं तथ्यों को निम्नलिखित बिंदुओं में रेखांकित किया जा सकता है-

  • संविधान सभा का गठन- संविधान सभा का गठन 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के तहत चुनाव के जरिए संविधान सभा बनाई गई जिसमें कुल 299 सदस्य रहगए थे |
  • प्रारूप समिति- प्रारूप समिति 29 अगस्त, 1947 को स्थापित की गई थी, इस समिति का अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर को बनाया गया था, उनको भारतीय संविधान का मुख्य वास्तुकार भी माना जाता है |
  • बैठक और चर्चा- संविधान निर्माण के लिए कुल 11 सत्र हुए, जिसमें 165 दिनों तक संविधान के मसौदे पर गहन चर्चा हुई जिसमें 7635 संशोधनों पर विचार किया गया |
  • हस्ताक्षर और अपनाना- संविधान निर्माण के प्रमुख चरण में 26 नवंबर, 1949 को संविधान पास हुआ और इस पर 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए |
  • मूल संरचना- जब संविधान बना तब इसमें 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थी, जो दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान के रूप में जाना जाता है |
  • निर्माण कार्य- संविधान को 26 नवंबर, 1949 को अपनाया गया था और इसी दिन भारत के कुछ भागों में से लागू कर दिया गया |
  • हस्त लिखित दस्तावेज- मूल संविधान को “प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने लिखा था और नंदलाल बोस की टीम ने इसे पूर्ण रूप से सजाया था |

उपरोक्त बिंदुओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि संविधान सभा की पहली बैठक में डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थाई और बाद में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को स्थाई अध्यक्ष चुना गया इस प्रकार से हमारे संविधान निर्माण का कार्य पूर्ण किया गया था |

भारतीय संविधान के स्रोत
  • संविधान का लगभग 75% अंश भारत सरकार अधिनियम 1935 से लिया गया था |
  • मोतीलाल नेहरू कमेटी रिपोर्ट 1928 से मूल अधिकारों को शामिल किया गया |

अन्य देशों की संवैधानिक प्रणालियों से भी हमने कुछ बातों को भारतीय संविधान में समाहित किया था –

ब्रिटिश संविधान
  • सर्वाधिक मत के आधार पर चुनाव में जीत का फैसला |
  • सरकार का संसदीय स्वरूप |
  • कानून के शासन का विचार |
  • विधायिका में अध्यक्ष का पद और उसकी कानून निर्माण की विधि |
अमेरिकी संविधान
  • मौलिक अधिकारों की सूची
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना
  • न्यायिक पुनरावलोकन की शक्तियां
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता
  • उपराष्ट्रपति का पद
आयरलैंड का संविधान
  • राज्य के नीति निर्देशक तत्व
  • राज्यसभा में मनोनीत सदस्यों का प्रावधान
फ्रांस का संविधान
  • फ्रांस के संविधान से स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व का सिद्धांत लिया था
कनाडा का संविधान

कनाडा के संविधान से निम्नलिखित प्रावधानों को लिया गया था जैसे-

  • एक अर्ध संघात्मक सरकार का स्वरूप अर्थात सशक्त केंद्रीय सरकार वाली संघात्मक व्यवस्था |
  • विशिष्ट शक्तियों का सिद्धांत |

उपरोक्त अन्य देशों के संविधान से दिए गए कुछ प्रावधानों को देखते हुए कुछ विद्वानों ने संविधान को “उधार का ठेला” कहा था दूसरी तरफ भारत के संविधान को “पुष्प गुच्छ” भी कहा जाता है जिसमें विभिन्न देशों से लिए गए सिद्धांत रूपी पुष्प शामिल है |

निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि भारत का संविधान निश्चित रूप से इस दुनिया का सबसे सुंदर संविधान है जिसमें समय, काल और परिस्थितियों का आधार पर इसे दुरुस्त किया जा सकता है आज हमारा संविधान लोकतांत्रिक पद्धति की कसौटी पर खरा उतरता है जो निश्चित रूप से वैश्विक मंच पर हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूती से पेश करता है |

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